Electric Circuit Meaning in Hindi | विद्युत परिपथ कितने प्रकार के होते हैं?

Electric Circuit (विद्युत परिपथ)

Electric Circuit Meaning in Hindi | Electric Circuit Definition In Hindi|विद्युत परिपथ की परिभाषा।

Electric Current को बहने के लिए जिस माध्यम की आवश्यकता  होती है, उस माध्यम को Electric Circuit कहते हैं।

विद्युत परिपथ कितने प्रकार के होते हैं? | इलेक्ट्रिकल सर्किट कितने प्रकार के होते हैं?

Electric Circuit के मुख्य 3 प्रकार | विद्युत परिपथ के मुख्य 3 प्रकार

  1. Close Circuit ( पूर्ण परिपथ )
  2. Open Circuit (अपूर्ण परिपथ )
  3. Short Circuit ( शार्ट सर्किट )

1 ) Close Circuit (पूर्ण परिपथ)

जिस Electrical Circuit में Electric Current (I) सप्लाय सोर्स के Positive Point से Load Resistence ( R) से होते हुए सप्लाय सोर्स के Negative Point से मिलता है। और जिस सर्किट में Electric Current सहजता से फ्लो हो सकता हो उसे Close Circuit ( पूर्ण परिपथ ) कहते हैं।

(सप्लाय सोर्स मतलब Battery, Generator, या हमारे घर मे आने वाला Electric Supply हो सकता है।)

(Load Resistence ( R) मतलब कोई Bulb, Fan, Refrigerator, Tube Light, Moter, Electric Heater और हर वह उपकरण जो बिजली से चलता हो।)

आकृति..

Close Circuit ( पूर्ण परिपथ ) के उदाहरण.

  • Lamp का चालू होकर प्रकाश देना।
  • Electric Heater का गर्म होकर उष्णता देना।
  • Electric Moter का घूमकर यांत्रिक ऊर्जा प्रदान करना। इत्यादी..

यह सभी कार्य Closed Circuit की वजह से घटित होते हैं।

Close Circuit (पूर्ण परिपथ) के प्रकार | Types of Close Circuit-In Hindi

Resistance को जोड़ने के तरीकों के अनुसार Close Circuit को  3 प्रकारों में बांटा गया है।

  1. Series Circuit (सीरीज सर्किट)
  2. Parallel Circuit (पैरलल सर्किट)
  3. Compound Circuit ( कंपाउंड सर्किट)

Series Circuit (सीरीज सर्किट)

जिस Electrical Circuit में दो या दो से ज्यादा Resistance को जोड़ा जाता है। जिनमे से Current फ्लो होने के लिए उस Circuit में सिर्फ एक मार्ग होता है, उसे Series Circuit कहते हैं।

इस circuit के सभी Load Resistance का Connection एक Chain ( जंजीर) की तरह किया जाता है।

मतलब पहले Resistance का दूसरा Terminal Point दूसरे Resistance के पहले Terminal Point से,

दूसरे Resistance का दूसरा Terminal Point तीसरे Resistance के पहले Terminal Point से जोड़ा जाता है।

पहले Resistance का पहला Terminl Point और आखिरी Resistance का दूसरा Terminal Point सप्लाय देने के लिए उपयोग में लाया जाता है।

सीरीज सर्किट के गुणधर्म (Properties of Series Circuits in Hindi)
  1. Current फ्लो होने के लिए Circuit में सिर्फ एक ही मार्ग होता है, और Circuit का समूर्ण Current हर एक Resistance से होकर गुजरता है।        I=V÷R और  I= I1=I2 = I3 इत्यादि
  2. हर एक Resistance में Ohm के नियम के नुसार Current और Resistance के गुणाकार जितना Voltage Drop होता है।  VD1= I×r1 ; VD2= I×r2 ; VD3= I×r3
  3. हर एक Resistance में होने वाले Voltage Drop (VD) का योग (Total) उस सर्किट में दिए गए Total Supply Voltage (V) के बराबर होता है। V=V1+V2+V3
  4. Circuit का कुल (Total) Resistance उस Circuit के सभी Resistance के बराबर होता है। मतलब, जब सर्किट में Resistance की संख्या बढ़ती है तब उसी तरह सर्किट का कुल Resistance भी बढ़ता है। Ohm के सिद्धांत के अनुसार सर्किट का कुल करंट भी कम होता जाएगा। R=r1+r2+r3…rn (Number Of Resistance )
  5. सर्किट में अगर कोई Resistance टूट जाये या सर्किट कहीं से ओपन हो जाये तो, करंट फ्लो होने का मार्ग खंडित होकर पूरा सर्किट बंद हो जाता है। इस वजह से Series Circuit का कोई एक Resistance स्वतंत्र नियंत्रित नही किया जा सकता।
  6. जब एक समान मूल्य के Resistance सीरीज में जोड़ दिए जाएं तभी I×R इस तरह सभीको एक समान Voltage मिलता है, और वह सब Resistance एक समान काम करते है। नही तो हर एक Resistance के मूल्य के हिसाब से Voltage मिलता है। और वह काम-ज्यादा प्रमाण में कार्य करते हैं।
  7. अगर एक समान Watt और Ohm के 2 Resistance सीरीज में जोड़ दिए जाएं, तो सर्किट की कुल (Total) Power आधी हो जाती है।

उदाहरण:- अगर 100 Watt, 250 Volt के 2 बल्ब सीरीज में जोड़ दिए जाएं। और उस सीरीज सर्किट को 250 Volt का सप्लाय दिया जाए तो उस सर्किट की कुल Power  50 Watt हो जाएगी।और एक समान Watt के ‘N’ Resistance अगर सीरीज में जोड दिए जाएं, तो सर्किट की कुल Power यह एक Resistance की Power / N समान होती है।

Series Circuit का उपयोग कहाँ किया जाता है?
  1. कम Voltage Rating के Load Resistance ज्यादा Voltage सप्लाय पर जोड़ने हेतु।
  2. Circuit का कुल Current कम करने हेतु।
  3. आवश्यक जगहों पर Voltage Drop करके उद्देश्य साध्य करने हेतु।
  4. सजावट के Miniature Lamps Series में जोड़कर सजावट करने हेतु।
  5. Fuse जोड़ने हेतु। Fuse सर्किट में सीरीज में ही लगाया जाता है।
  6. Over Load Coil जोड़ने हेतु।
  7. Voltmeter में मल्टीप्लायर जोड़ने हेतु।
  8. Torch या Battery में कम Voltage के Cells Series में जोड़कर Circuit Voltage बढ़ाने हेतु।
  9. Ameter जोड़कर Current Reading हेतु।

Parallel Circuit (पैरलल सर्किट)

जिस Electrical Circuit में जितने Load Resistance जोड़े जाते हैं। उतनेही उस Circuit में Current बहने के मार्ग होते हैं। उसे Parallel Circuit (पैरलल सर्किट) कहते हैं।

इस आकृति में अगर आप देखें तो आपको पता चलेगा कि, प्रत्येक Load Resistance से सप्लाय सोर्स से आने वाले स्वतंत्र Positive And Negative Terminals जुड़े हुए हैं।

Parallel Circuit के गुणधर्म (Property of Parallel Circuit In Hindi)
  1. सभी Load Resistance को स्वतंत्र विद्युत सप्लाय मिलता है। विद्युत सप्लाय का Voltge और हर एक Resistance को मिलने वाला Voltage एक समान होता है। V=V1=V2=V3
  2. प्रत्येक Resistance में उसके मूल्य के समानुपात में Current का विभाजन होता है।
  1. प्रत्येक Resistance में से बहने वाले करंट का कुल योग (Total) उस सर्किट के कुल Current के बराबर होती है। (I=i1+i2+i3…in)
  2. सर्किट का कुल Resistance ज्ञात करने के लिए सभी कंडक्टन्स की Total करके कुल कंडक्टन्स (G) ज्ञात किया जाता है। और कुल कंडक्टन्स का कुल Resistance में परिवर्तन करना पड़ता है।
      • R= 1÷G
  1. सर्किट में जैसे-जैसे Resistance जुड़ते जाते हैं। वैसे-वैसे सर्किट का कुल Resistance कम होता जाता है।
  1. सर्किट का कुल Resistance उस सर्किट में मौजूद सबसे कम से कम Resistance से भी कम होता है।

उदाहरण:-

  1. अगर सर्किट में कोई Resistance Open or Shot हो जाये, तो इसका प्रभाव सर्किट में मौजूद बाकी किसी भी Resistance पर नही पड़ता। हर एक Load Resistance स्वतंत्र नियंत्रित किया जा सकता है।
Parallel Circuit का उपयोग कहाँ किया जाता है? |Where is the Parallel Circuit use-In Hindi?
  1. Parallel Circuit का उपयोग हर प्रकार की Wiring में किया जाता है। उदाहरण:- House Wiring, Shop Wiring, Factory Wiring
  2. सर्वसाधारण घर के उपकरण (Home Equipments) और Lamps जोड़ने हेतु।
  3. स्ट्रीट लाईट जोड़ने हेतु।
  4. Ammeter में शंट (Shunt) जोड़ने हेतु।
  5. Voltmeter जोड़कर Voltage मापने के लिए।
  6. Battery में अनेक Cells एक साथ जोड़कर Current Capacity बढ़ाने के लिए।

Compound Circuit (कम्पाऊन्ड सर्किट)

Series Circuitऔर Parallel Circuit को एकत्रित करके जो नया Electrical Circuit बनता है, उसे Compound Circuit (कम्पाऊन्ड सर्किट) कहते हैं। इस प्रकार के Circuits का उपयोग House Wiring में नही किया जाता। Electronics Sector में Compound Circuits का उपयोग किया जाता है।  इसमे कुछ Load Resistance Series में जोड़कर उनके Parallel में कुछ और Resistance जोड़े जातें हैं।

2) Open Circuit (अपूर्ण परिपथ)

जिस Electric Circuit में Electric Current (I) सप्लाय सोर्स के Positive Point से Negative Point तक नही पोहोंच पता, Current Flow होने का मार्ग किसी कारणवश कहीं ओपन हो जाता है। उस Curcuit को Open Circuit (अपूर्ण परिपथ) कहते हैं।

Open Circuit (अपूर्ण परिपथ) के उदाहरण

  • Circuit का Switch Off होना। या Switch का Contact सही से न हो पाना।
  • Fuse Wire का जल जाना।
  • Close Circuit की wire कहीं से टूट जाना।

3 ) Short Circuit (शार्ट सर्किट)

जिस Curcuit में Electric Current  बहने का मार्ग Load Resistance के बिना पूरा होता हो, मतलब सप्लाय सोर्स के Positive and Negative points यह दोनों कम से कम Resistence के बिना एक दूसरे से जुड़ते हैं, तो उस Circuit को Short Circuit (शार्ट सर्किट) कहते हैं।

Short Circuit में Current बहने मे कोई Resistance (रुकावट) न होने के कारण उस Circuit में से मर्यादा से ज्यादा Current बहने लगता है। इस वजह से Wire का Insulation गर्म होकर पिघलने लगता है। कई बार तो आग लगने की संभावना तक बन जाती है। अगर ऐसे किसी Circuit में उचित क्षमता वाला Fuse Wire हो तो वह गर्म होकर पिघलकर टूट जाता है। और अगर उस Circuit में MCB कार्यरत हो तो वह Operate हो जाता है। और उस Short Circuit को Open Circuit में बदल देता है। और इस तरह उस सर्किट में होने वाली दुर्घटना या हानी को टाला जा सकता है।

उपर बताये गए तीनो मुख्य Electric Circuits को अगर आप ध्यान से देखें तो आपको समझ मे आएगा कि, इनमे से Close Circuit में करंट (Current), वोल्टेज Voltage, और रेजिस्टेन्स ( Resistance) का अस्तित्व होता है। इन तीनों राशियों में एक विशेष संबंध होता है। जो उस सर्किट में अस्तित्व में होती हैं।

एक प्रसिद्ध वैज्ञानिक जॉर्ज सायमन ओहम (Georg Simon Ohm) जिन्होंने करंट (Current), वोल्टेज Voltage, और रेजिस्टेन्स (Resistance) के बीच के इस संबंध को अपने एक नियम रूप में दुनिया के सामने रखा है। जिसे ओहम का सिद्धांत (Ohm’s Low) कहते हैं।

Ohm’s Low क्या दर्शाता है?

ओहम का नियम। पढिए…….

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