स्टार डेल्टा स्टार्टर कैसे काम करता है? | Star Delta Starter In Hindi

दोस्तों किसी भी 3 Phase Induction Moter को शुरू करने के लिए एक स्टार्टर की जरूरत पड़ती है। ज्यादा Horse power की 3 Phase Induction moter को शुरू करने के लिए स्टार डेल्टा स्टार्टर ( Star Delta Starter) की जरूरत पड़ती है।

स्टार कनेक्शन और डेल्टा कनेक्शन क्या होता है?

स्टार डेल्टा स्टार्टर के क्या फायदे हैं?

स्टार डेल्टा स्टार्टर के मुख्य तीन प्रकार के होते हैं।

  1. मैनुअली ऑपरेटेड स्टार डेल्टा स्टार्टर
  2. ओटोमेटिक स्टार डेल्टा स्टार्टर
  3. सेमि ऑटोमेटिक स्टार डेल्टा स्टार्ट

मैनुअली ऑपरेटेड स्टार डेल्टा स्टार्टर

इस प्रकार के स्टार डेल्टा स्टार्टर में एक फाइबर रॉड पर Contact पट्टियां लगी होती हैं। उसी फाइबर रॉड के एक छोर पर एक इंसुलेटेड हैंडल भी लगा होता है। कांटेक्ट पट्टियों की तरफ L1, L2 और L3 यह तीन टर्मिनल्स होते हैं। इन तीनो टर्मिनल्स के सीरीज में O.L.C. (Over Load Coil) जोड़ी जाती हैं।

यह तीनो टर्मिनल्स थ्री फेज सप्लाय से जोड़ने के लिए होते है। इसमें और छह टर्मिनल्स होते जो U1,V2, V1, W2, W1, U2 इस प्रकार होते हैं। इन टर्मिनल्स को थ्री फेज इंडक्शन मोटर के 6 टर्मिनल्स जोड़ा जाता हैं। NVC (No Volt Coil) और Stop बटन यह आपस मे सीरीज में जोड़कर तीन फेज में से किसी 2 फेज के पैरलल जोड़े जाते हैं।

मैनुअली ऑपरेटेड स्टार डेल्टा स्टार्टर कैसे काम करता है?

स्टार्टर को थ्री फेज सप्लाय से जोड़कर स्टार्टर का हैंडल नीचे की ओर किया जाता है, तब W2,U2,V2 यह तीनों टर्मिनल्स एकसाथ शार्ट हो जाते हैं। L1-U1, L2-V1, L3- W1 इस तरह थ्री फेज सप्लाय मोटर वाइंडिंग को मिलकर मोटर स्टार कनेक्शन से जुड़ जाती है। स्टार कनेक्शन में मोटर का स्टार्टिंग करंट कम होकर मोटर धीमी गति से घूमने लगती है। थोड़ी देर बाद जब मोटर अपनी मूल गति के 75 से 80 प्रतिशत गति पर आती है तब स्टार्टर का हैंडल ऊपर कीओर किया जाता है। जिस वजह से मोटर स्टार कनेक्शन से डेल्टा कनेक्शन में आ जाती है। हैंडल ऊपर करतेही कांटेक्ट पट्टियां ऊपर की तरफ हो जाती हैं। और L1 U1 V2, L2 V1 W 2, L3 W1 U2 इस तरह से टर्मिनल्स शार्ट होकर मोटर डेल्टा कनेक्शन से जुड़ जाती है। इस प्रकार मोटर की रनिंग पोज़िशन में मोटर वाइंडिंग को पूर्ण सप्लाई वोल्टेज मिलकर मोटर अपनी उच्चत्तम गति से घूमने लगती है।

Star Delta Starter Diagram in hindi

मैनुअली ऑपरेटेड स्टार डेल्टा स्टार्टर की वजह से होने वाली संभावित गलतियां

मैनुअली ऑपरेटेड स्टार डेल्टा स्टार्टर का हैंडल हाथ से घुमाकर ऑपरेट करते समय कुछ गलतियां हिने की संभावना हमेशा होती है

उदाहरण

प्रथम स्टार्टर का हैंडल नीचे की ओर करके मोटर पहले स्टार कनेक्शन से जुड़ना जरूरी होता है। मोटर अपनी मूल गति के 75 से 80 % गति पर आने के बाद हैंडल ऊपर की तरफ करकर मोटर को डेल्टा कनेक्शन से जोड़ना पड़ता है। लेकिन हैंडल नीचे दबाने पर कई बार कॉन्टेक्ट्स सही तरीके से नही हो पाते। उसी समय हैंडल ऊपर की ओर करने पर मोटर डायरेक्ट डेल्टा कनेक्शन से जुड़ने की संभावना होती है।

मोटर डायरेक्ट डेल्टा कनेक्शन से जुड़ने की वजह से मैनुअली ऑपरेटेड स्टार डेल्टा स्टार्टर इस्तेमाल करने का उद्दश्य पूरा नही होता। इस प्रकार की त्रुटि को दूर करने के लिए स्टार कनेक्शन्स से डेल्टा कनेक्शन में मोटर ऑटोमेटिक जा सके इसलिए ऑटोमेटिक स्टार डेल्टा स्टार्टर का इस्तेमाल ज्यादा किया जाता है।

ऑटोमेटिक स्टार डेल्टा स्टार्टर

इस प्रकार के स्टार्टर में तीन कॉन्टैक्टर्स होते हैं

  1. Main Contactor
  2. Star Contactor
  3. Delta Contactor

और एक टाइमर लगा होता है, टाइमर में नॉर्मली ओपन और नॉर्मली क्लोज कांटेक्ट होते हैं। टाइम सेटिंग के हिसाब से एक निश्चित समय पर नॉर्मली ओपन contact क्लोज होता है और उसी समय नॉर्मली close कांटेक्ट ओपन हो जता है।

ऑटोमेटिक स्टार डेल्टा स्टार्टर कैसे काम करता है?

ऑटोमेटिक स्टार डेल्टा स्टार्टर की आंतरिक रचना आकृति में दिखाई गई है।इस स्टार्टर में एक में कॉन्टैक्टर दूसरा स्टार कॉन्टैक्टर और तीसरा डेल्टा कॉन्टैक्टर होता है। एक टाइमर होता है किसमे एक N.O. (Normally Open) और एक N.C. (Normally Close) ऐसे दो कॉन्टेक्ट्स होते हैं।टाइमर के टाइम सेटिंग के हिसाब से एक निश्चित समय पर N.O. कांटेक्ट N.C. हो जाता है, और उसी समय N.C. कांटेक्ट N.O. हो जाता है। जैसा की आकृति में दिखाया गया है। L1,L2,L3 को 3 फेज सप्लाय से जोड़ा जाता है। और U1,V2,W1,U2 एवं V1, W2 इन टर्मिनल्स को 3 फेज इंडक्शन मोटर के 6 टर्मिनल्स जोड़े जाते हैं। जब इस स्टार्टर का स्टार्ट बटन दबाया जाता है, तब L3 यह एक फेज थर्मल स्विच ,स्टार्ट बटन और टाइमर से होते हुए स्टार कॉन्टैक्टर की NVC के एक टर्मिनल को मिलता है। जिस NVC को ऑपरेट होने के लिए 2 फेज की जरूरत होती है। दूसरा फेज L2 स्टार कॉन्टैक्टर की NVC के दूसरे टर्मिनल को Dirrect दिया जाता है, जैसा कि आकृति में दिखाया गया है। स्टार कॉन्टैक्टर की NVC को ON पुश बटन दबाने पर जब 2 फेज मिलते है, तब स्टार कॉन्टैक्टर ON होकर U1, V1 और W1 यह तीनों टर्मिनल शार्ट हो जाते हैं। अक्रुति में आप ध्यान से देखेंगे तो आपको अच्छेसे समझ के आ जाएगा। ठीक इसी ऑटोमेटिक समय स्टार डेल्टा स्टार्टर के में कॉन्टैक्टर कई NVC को भी 2 फेज मिलते हैं। और मेन कॉन्टैक्टर भी ON हो जाता है। और 3 फेज इंडक्शन मोटर के U2,V2 और W2 कॉन्टेक्ट्स को L1,L2 और L3 3 फेज सप्लाई मिलता है। और 3 फेज इंडक्शन मोटर स्टार स्टार कनेक्शन से जुड़ जाती है, स्टार्टिंग करंट कम होकर मोटर आसानी से शुरू हो जाती है।

U1- W2,

V1- V2,

W1-U2 

इस तरह से थ्री फेज इंडक्शन मोटर के टर्मिनल्स शार्ट होकर डेल्टा कनेक्शन में परावर्तित हो जाते हैं।

U1- W2 को L1

V1- V2, को L2

W1-U2 को L3

इस तरह से 3 फेज सप्लाई मिलकर मोटर डेल्टा कनेक्शन में आ जाती है। इस तरह मोटर वाइंडिंग को पूरा फेज वोल्टेज मिलता है और मोटर अपनी उच्चत्तम गति पर घूमने लगती है।

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