स्टार कनेक्शन और डेल्टा कनेक्शन क्या है? | What is Star Connection and Delta Connection?- In Hindi

स्टार कनेक्शन और डेल्टा कनेक्शन क्या है? | What is star connection and delta connection?-In Hindi | स्टार कनेक्शन और डेल्टा कनेक्शन  कैसे किया जाता है?

3 Phase Supply System को अधिक कार्यक्षम बनाने के लिए 3 Phase Winding का कनेक्शन एक विशिष्ट तरीके से किया जाता है। उस कनेक्शन को 3 Phase का आंतरिक कनेक्शन कहते हैं। 3 phase पावर का ट्रांसमीशन, डिस्ट्रीब्यूशन और यूटीलायझेशन करने के लिए 3 Phase का आंतरिक कनेक्शन करना बहुत ही जरूरी होता है।

स्टार कनेक्शन और डेल्टा कनेक्शन (Star Delta) कनेक्शन डायग्राम | Star Delta connection Diagram

( स्टार कनेक्शन ) Star Delta Connection Diagram In Hindi

यह आंतरिक कनेक्शन स्टार और डेल्टा [स्टार कनेक्शन और डेल्टा कनेक्शन (Star Delta)] इन दो तरीकों से किया जाता है।

स्टार कनेक्शन (Star Connection)

इस कनेक्शन को स्टार कनेक्शन (Star Connection) अथवा वाय (Y) कनेक्शन कहा जाता है। आकृति में जैसा कि दिखाया गया है, 3 Phase Winding के 6 टर्मिनल्स में से शुरुवात के U1, V1, W1 या U2, V2, W2 इन 2 समूहों में से किसी भी एक समूह के तीनों टर्मिनल्स एक साथ शार्ट (Short) किए जाते हैं। बचे हुए 3 टर्मिनल्स सप्लाय के लिए बाहर निकले  जाते हैं।

स्टार कनेक्शन (Star Connection) का स्टार पॉइंट (Star Point) | Star Point of Star Connection-In Hindi

Star Point of Star Connection (स्टार कनेक्शन)In Hindi

जिस समुह को एक साथ शार्ट (Short) किया जाता है, उनके शार्ट किये हुए पॉइंट को स्टार कनेक्शन (Star Connection) का स्टार पॉइंट (Star Point) कहा जाता है। इस स्टार पॉइंट (Star Point) से न्यूट्रल वायर बाहर निकाली जाती है।

स्टार कनेक्शन (Star Connection) के गुणधर्म | Properties of Star Connection-In Hindi

  • स्टार कनेक्शन (Star Connection) में फेज करंट और लाईन करंट एकसमान होता है। (IL =Iph) क्योंकि स्टार कनेक्शन (Star Connection) की वजह से किसी भी 2 फेज वाइंडिंग में से करंट बहने का मार्ग एक ही होता है।
  • लाईन वोल्टेज फेज वोल्टेज के √3 गुना ज्यादा होता है।
  • इनमेसे कोई भी 2 फेज वोल्टेज में से एक निगेटिव्ह फेज वोल्टेज (-Vph) और दूसरा पॉजिटिव फेज वोल्टेज (Vph) दोनों में 60° का फेज डिफरेन्स होता है।
  • लाईन वोल्टेज फेज वोल्टेज से 30° से लीडिंग होता है।
  • कुल पावर तीनो फेज के पावर के कुल योग जितनी होती है।

स्टार कनेक्शन (Star Connection) की कुल पावर का सूत्र| Formula for Total Power of Star Connection

Formula for Total Power of Star Connection in Hindi

स्टार कनेक्शन (Star Connection) का उपयोग कहाँ किया जाता है? | Where is Star Connection used?-In Hindi

  •  स्टार कनेक्शन (Star Connection) का उपयोग 3 phase 4 wire System में किया जाता है। 3 Phase 4 Wire System सेकंडरी डिस्ट्रीब्यूशन के लिए उपयोग में लाया जाता है। इस मे 3 फेज wire R, Y, B और एक न्यूट्रल ‘N’ का इस्तेमाल होता है। न्यूट्रल wire जो कि स्टार कनेक्शन (Star Connection) के स्टार पॉइंट (Star Point) से कनेक्ट होती है।
  • Generating Stations में अल्टरनेटर का स्टार कनेक्शन (Star Connection) किया जाता है।
  • बड़ी-बड़ी 3 Phase Induction Moters शुरू करने के लिए. स्टार कनेक्शन (Star Connection) का उपयोग कीट जाता है।

डेल्टा कनेक्शन (Delta Connection)

डेल्टा कनेक्शन डायग्राम

डेल्टा कनेक्शन किस प्रकार किया जाता है? | How is the Delta Connection done?-In Hindi

डेल्टा कनेक्शन को मेश कनेक्शन भी कहा जाता है।

ऊपर जैसा की आकृति मे दिखाया गया है, की डेल्टा कनेक्शन में 3 Phase Winding के अलग-अलग पॉइंट्स शार्ट (Short) किये जाते हैं। और शार्ट किये गए पॉन्ट्स से 3 वायर्स स्पाय के लिए बाहर निकाली जाती हैं। मतलब U,V,W इन 3 फेज वाइंडिंग के U2 V1, V2 W1, W2 U1 इस प्रकार अथवा

U1 V2, V1 W2, W1 U2 इस प्रकार यह पॉइंट्स शार्ट किये जाते हैं। और शार्ट किये पॉइंट्स से सप्लाय के लिए 3 वायर्स बाहर निकली जाती है। इस प्रकार डेल्टा कनेक्शन किया जाता है।

डेल्टा कनेक्शन के गुणधर्म | Properties of delta connection-In Hindi

  • इस कनेक्शन में प्रत्येक फेज वाइंडिंग 2 फेज के पैरलल अती है, इस वजह से फेज वोल्टेज और लाईन वोल्टेज एक समान होता है।
  • लाईन करंट यह फेज करंट से √3 गुना ज्यादा होता है।

 

स्टार कनेक्शन और डेल्टा कनेक्शन में क्या  फर्क होता है? | What is the Difference Between Star Connection and Delta Connection?-In Hindi

स्टार कनेक्शन (Star Connection)

डेल्टा कनेक्शन (Delta Connection)

  1. लाईन करंट = फेज करंट
  1. लाईन करंट = √3 × फेज करंट
  1. लाईन वोल्टेज = √3 फेज वोल्टेज
      2.   लाईन वोल्टेज = फेज वोल्टेज
  1. कुल पावर = √3 × VL × IL× पावर फैक्टर
      3. कुल पावर = √3 × VL × IL× पावरफैक्टर
  1. फेज वोल्टेज यह लाईन वोल्टेज से √3 गुना कम होने की वजह से वाइंडिंग में लगने वाले टर्न्स किस संख्या कम होती है। इस वजह से कॉपर की बचत होती है।
      4.लाईन वोल्टेज और फेज वोल्टेज समान होने के कारण इस कनेक्शन की               वाइंडिंग में टर्न्स की संख्या ज्यादा होती है।
  1. इसमें न्यूट्रल उपलब्ध होती है।
    5. इसमें न्यूट्रल नही होती.
  1. न्यूट्रल उपलब्ध होने की वजह से 240 वोल्ट फेज वोल्टेज व 415 वोल्ट लाईन वोल्टेज ऐसे 2 प्रकार के वोल्टेज मिलते हैं। इसलिए इस कनेक्शन पर सिंगल फेज पर लाइटिंग लोड और 3 Phase पर पावर लोड जोड़ा जा सकता है।
    6. इस कनेक्शन में सिर्फ 415 वोल्ट 3 Phase ही उपलब्ध होता है। इस कारण           इसमें 1सिंगल फेज का लोड नही ले सकते।
  1. इसमें लाईन वोल्टेज यह फेज वोल्टेज से 30° लीडिंग होता है।
    7.इसमें लाईन करंट यह फेज करंट से 30° लीडिंग होता है।
  1. इसमें ब्रेकडाउन वोल्टेज कम होता है।
    8. इसमें ब्रेकडाउन वोल्टेज कम होता है।

 

Leave a Comment

%d bloggers like this: