AC Current (Alternating Current) क्या है? | AC Current की परिभाषा

  • What is an Alternating Current? | Definition of AC Current- In Hindi

दोस्तों अगर आप ITI Electrical क्षात्र हैं, या Electricals मे रुचि रखते हैं।आप AC Current के बारे मे हिन्दी मे जानना चाहते हैं। तो यह लेख पढ़ें

विषय सूची

AC Current (Alternating Current) की परिभाषा

Definition of AC Current (Alternating Current)- In Hindi

AC Current (Alternating Current)- In Hindi

जो Electric Current अपना मूल्य एवं दिशा हमेशा बदलता रहता है , उस Current को AC Current (अल्टरनेटिंग करंट) कहा जाता है। जब किसी विद्युत चुम्बकीय क्षेत्र में एक कंडक्टर के माध्यम से बदलाव होता है। तब उस कंडक्टर में फॅरेडे के Electro Magnetic Induction के नियम केअनुसार EMF (Electro Motive Force) निर्माण होता है। (इलेक्ट्रॉन्स को गति देने वाला फोर्स)

इलेक्ट्रॉन्स क्या होते हैं?

DC विद्युत के मुकाबले AC Alternating Current विद्युत निर्मिति ज्यादा क्यों कि जाति है?

Why is AC power generation more important than DC power?-In Hindi

DC विद्युत निर्मिति से ज्यादा AC विद्युत निर्मिति सस्ती होती है। इसके अलावा AC Voltage को Transformer की मदत से आसानी से कम या ज्यादा किया जा सकता है। इस वजह से विद्युत शक्ति एक जगह से दूसरे जगह पर ले जाना (Transmission) और विद्युत ग्राहकों के Load तक Distribute करना सस्ता पड़ता है।

बड़े बड़े कारखानों में DC Motors से ज्यादा AC Motors का इस्तेमाल ज्यादा होता है। घरेलू उपयोग के लिए AC विद्दयुत ही बड़े पैमाने पर काम मे लाई जारी है। इएलिये कुल विद्युत निर्मिति के 98% उत्पादन यह AC विद्युत का किया जाता है।

AC Current (Alternating Current) के संदर्भ में कुछ महत्वपूर्ण परिभाषाएं

Some important definitions in terms of AC current (Alternating Current)-In Hindi

AC सायकल (AC Cycle)

1 AC Cycle In Hindi

AC  Current या फिर AC Voltage के समूर्ण 360° के एक फेरे को 1 AC Cycle कहते हैं। AC EMF निर्मिति में जब एक कंडक्टर दो Megnatic Poles के बीच घूमता है। कंडक्टर के उस एक फेरे में Alternating Current और AC Voltage का भी एक फेरा पुरा होता है।

एक AC Cycle  में Current अथवा Voltage दो बार अपनी दिशा बदलते है। AC Cycle के आधे फेरे में Current अथवा Voltge की जो दिशा होती है, उसकी बिल्कुल विपरीत दिशा बाकी आधे Cycle में उनकी होती है। एक AC Cycle में इनका मूल्य भी बदलता रहता है।

AC Time Period (AC टाईम पीरियड) 

AC Current या AC Voltage का एक फेरा (1 AC Cycle) पूरा होने में जो समय लगता है उसे AC Time Period (AC टाईम पीरियड कहते हैं।

Frequency ( फ्रिक्वेंसी)

एक सेकंड में AC Current या Voltage की जितनी Cycles पूरी होती हैं। उन Cycles की संख्या को Frequency (फ्रीक्वेंसी) कहते हैं।

Frequency दर्शाने के लिए सांकेतिक चिन्ह F का उपयोग किया जाता है। और Frequency की इकाई Cycle/Second ( C/S ) अथवा हर्टझ (Hz) है।

हर राष्ट की विद्युत उत्पादन प्रणाली में Frequency अलग-अलग होती है। हमारे भारत देश मे Frequency 50 Cycle / Secons इतनी निर्धारित की गई है। भरतीय विद्युत नियम के अनुसार निर्धारित Frequency में 3% कम या ज्यादा बदलाव नही होना चाहिए।

पीक मूल्य (Peak Valuer Or Amplitude)

Peak Value (Peak Value Or Amplitude)

 

अदिश राशी (Scaler Quality) 

जिस राशि का मूल्य होता है परंतु दिशा नही होती, ऐसी राशि को अदिश राशि (Scaler Quantity) कहते है। उदाहरण वजन ,समय , लंबाई इत्यादि। ऐसी राशियां स्केल में मापी जा सकती है। अदिश राशियों के योग और घटाने में सिर्फ उनके मूल्य का विचार किया जाता है।

सदिश राशी (Vector Quantity)

जिस राशी का अपना मूल्य और दिशा होती है, उस राशि को सदिश राशि (Vector Quantity) कहते हैं। उदाहरण- त्वरण ,बल और AC System की सभी राशियां।

सदिश राशि को दर्शाने के लिए (->) का उपयोग होता है। Vector मतलब एक लंबी रेखा जिसके सिरे पर एक बाण का चिन्ह दर्शाया जाता है।

ऐसी रेखा की लंबाई मतलब उस Vector का मूल्य और बाण की चिन्ह मतलब उस Vector की दिशा। ऐसा इसका मतलब होता है। सदिश राशियों का योग अथवा घटने के लिए सिर्फ अंकों का योग या घटना नही किया जा सकता। अंको के अलावा दिशा का भी विचार किया जाता है।

 

उदाहरण आकृति

 

फेज (Phase)

AC Cycle में किसी भी क्षण में Vector का अस्तित्व होना मतलब फेज होता है। 

दो AC Generators अगर एक ही समय पर एक speed में शुरू किए जाए तब , दोनों Generators में निर्माण होने वाले Voltage की Cycles नीचे दी हुई आकृति की होंगी।

आकृति

In-phase (इन फेज)

AC विद्युत प्रणाली में दो अथवा दो से ज्यादा राशियां (Current अथवा voltage) एक ही समय पर ‘0’ शून्य से शुरू होकर एकही समय पर अपने अधिकतम मूल्य पर पोहोंचती हो। और वहां से एक साथ कम-कम होकर एक ही समय पर ‘0’ शून्य तक पोहोंचती हो, तो उन राशियों को In-phase (इन फेज) कहा जाता हैं।

Out of Phase ( आउट ऑफ फेज)

A C विद्युत प्रणाली में दो या दो से ज्यादा राशियां एक ही समय पर ‘0’ शून्य से शुरू न होकर आगे पीछे शुरू होती हैं। और एक ही समय पर अपने उच्चतम मूल्य पर न पोहोंचकर आगे पीछे पोहचती हैं। और आगे पीछे ‘0’ शून्य तक पोहोंची हैं। उन राशियों को आऊट ऑफ फेज (Out of Phase) कहा जाता है।

 

आकृति

 

Phase Difference (फेज डिफरेंस)

AC विद्युत प्रणाली में दो राशियों में स्थित अंशात्मक कोण को Phase Difference (फेज डिफरेंस) कहते हैं। इसे Electrical Degree या रेडियन्स में गिनते हैं।

1 डिग्री = 0.017 रेडीयन, 1 रेडीयन = 57.69 डिग्री

किसी भी in-phase राशी में ‘0’ शून्य अंश का Phase Difference होता है। और Out of Phase राशि मे 0 से 90 के बीच (थीटा) डिग्री का Phase Difference होता है।

Power Factor (पॉवर फॅक्टर) | पॉवर फॅक्टर क्या होता है?

किसी भी दो A C राशियों के बीच के Phase Difference के कोसाईन गुणोत्तर को (Power Factor) पावर फॅक्टर कहते हैं।

 Power Factor = Cos थीटा

पॉवर फॅक्टर 0 से 1 के बीच ही क्यों होता है?

AC Circuit में किसी भी दो राशियों के बीच ज्यादा से ज्यादा 90 डिग्री का और कम से कम 0 शून्य डिग्री का Phases Difference हो सकता है।

इसलिए Cos 90 = 0 और Cos 0= 1

इस तरह किसी भी A C Circuit में ज्यादा से ज्यादा 1 और कम से कम 0 इतनाही Power Factor होता है।

Inductance (इंडक्टन्स)

किसी Coil को A C Suplay दिया जाए तो उस coil में बहने वाला Current अपनी दिशा एवं मूल्य निरंतर बदलता रहता है। इस वजह से Coil में सेल्फ इंडक्शन (Self Induction) की प्रक्रिया होती है।

सप्लाय से जुड़ी हुई coil के निकट यदि एक दूसरी coil रख दी जाए तो दूसरी coil में म्यूचअल इंडक्शन (Mutual Induction) की क्रिया होती है, और उस दूसरी Coil में EMF निर्माण होता है।

Electro Magnetic Induction की इस क्रिया में निर्माण होने वाला EMF (Electro Motive Force) यह लेंझ के नियम के नुसार पहली coil में बहने वाले Current के बल को विरोध करता है।

अगर यह मानकर चलें तो Coil में बहने वाले AC Current के बल को विरोध करने का गुण या लक्षण Coil में होता है। इसी गुण को Inductance (इंडक्टन्स) कहते हैं। Inductance की परिभाषा कुछ इस प्रकार की होगी।

 इंडकटन्स (Inductance) की परिसभाषा हिंदी में

” Coil में बहने वाले बदलते प्रवाह को विरोध करने वाला गुण Inductance (इंडक्टन्स) कहलाता है।”

Inductance का सांकेतिक चिन्ह L है। और इसका यूनिट हेनरी है।

हेनरी (Henry)

अगर किसी कॉईल में एक सेकंड में 1 एम्पियर का बदलाव होता है। और उस बदलाव से अगर उस कॉईल में 1 वोल्ट निर्माण होता हो, तो उस कॉईल के इंडकटन्स को 1 हेनरी कहा जाता है।

इंडक्टिव रिएक्टन्स ( Inductive Reactance)

अगर किसी कॉईल को AC Supply दिया जाए । तो कॉईल की ओर से करंट बहने में जो प्रतिरोध होता है, उसे इंडक्टिव रिएक्टन्स ( Inductive Reactance) कहते है।

इसे X l से दरसगते हैं। और Ohm (ओम) में गिनते हैं।

कैपैसिटन्स (Capacitance)

इलेक्ट्रिक चार्ज के रूप में इलेक्ट्रिक एनर्जी संचय करने के कैपेसिटर के गुण को कैपैसिटन्स (Capacitance) कहते हैं। कैपेसिटन्स का यूनिट फॅरेड (F) है और इसका संकेतांक C है।

फॅरेड

कैपेसिटर में एक कुलॉम्ब (1एम्पियर × 1सेकंड) की वजह से अगर 1 वोल्ट पोटेंशियल डिफरेन्स मिलता हो, तो उस कैपेसिटर का कैपैसिटन्स 1 फॅरेड होता है।

कैपेसिटिव रिएक्टन्स (Capacitive Reactance)

AC सर्किट में करंट बहने में जो प्रतिरोध किसी कैपेसिटर की ओर से होता है। उसे कैपेसिटिव रिएक्टन्स (Capacitive Reactance) कहते हैं। इसका संकेतांक Xc है। इसे ओम (Ohm) में गिनते हैं।

रिएक्टन्स

इंडक्टिव रिएक्टन्स और कैपेसिटिव रिएक्टन्स इनके परिणामी प्रतिरोध को रिएक्टन्स कहते हैं।

इम्पीडंस (Impedance)

AC सर्किट में रेझीस्टन्स और रिएक्टन्स इनके व्हेक्टर के योग को इम्पीडंस (Impedance) कहते हैं। इम्पीडंस मतलब AC सर्किट का करंट बहने में होने वाला कुल प्रतिरिध होता है। इसका संकेतांक Z है । और इसे ओम (Ohm) में गिनते हैं।

कंडक्टन्स [G]

रेझिस्टन्स के विरुद्ध जो घटक होता है उसे कंडक्टन्स कहते हैं। इसका संकेतांक G है और इसका यूनिट म्हो (mho) है।

ससेप्टन्स [B]

रिएक्टन्स के विरुद्ध जो घटक होता है उसे ससेप्टन्स कहते हैं। इसका संकेतांक B है। और इसका यूनिट म्हो (mho) है।

अडमिटन्स [Y]

इम्पीडंस के विरुद्ध जो घटक होता है उसे अडमिटन्स कहते हैं। इसका संकेतांक Y है। और इसका यूनिट म्हो (mho) है।

अर्थिंग करना जरूरी क्यों होता है। Why Earthing System is Important? (In Hindi)

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